Motivational poems in hindi by rabindranath tagore
Rabindrath tagore hindi poem धीरे चलो, धीरे बंधु लिए चलो धीरे मंदिर में, अपने विजन में पास में प्रकाश नहीं, पथ मुझको ज्ञात नहीं छाई है कालिमा घनेरी चरणों की उठती ध्वनि आती बस तेरीरात है अँधेरी हवा सौंप जाती है वसनों की वह सुगंधि,तेरी, बस तेरी उसी ओर आऊँ मैं, तनिक से इशारे पर,करूँ नहीं देरी दिन पर दिन चले … Read more